By | July 11, 2021

जयशंकर प्रसाद भारत के एक महान कवि थे. साथ ही साथ कविकर होने के साथ साथ बेहतरीन नाटककार , कहानीकार, निबंधकार और उपन्यासकार भी रहे.

ये हिंदी के छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक माने जाते थे. क्योकि ये हिंदी कविता को छायावादी युग की रचना की.

जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 को वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था. इनके द्वारा लिखी गयी स्वतंत्रता पुकारती (swatantrata pukarti kavita ) बहुत ही ज्यादा प्रचलित हैं. जिसमे उन्होंने स्वतंत्रता सेनानिओ को समर्पित कर दिया था.

आइये आपको बताते है कि स्वतंत्र कविता का उद्देष्य क्या है? (swatantrata pukarti kavita ka uddeshy kya hai?) और इसकी व्याख्या करते हैं.

स्वतंत्रता पुकारती कविता का भावार्थ एवं उद्देश्य लिखिए उत्तर

आज के इस पुरे दुनिया में जातिवाद, प्रान्तीयतावाद तथा अनके तथ्य और समस्याएँ उत्पन्नं होती हैं. ऐसे भी चन्द्रगुप्त द्वारा लिखित “‘मेरा देश मालव ही नहीं, गांधार भी है” टिप्पड़ी से भी नए सन्देश की प्राप्ति होती है.

स्वतंत्रता पुकारती कविता का  उद्देश में जय शंकर प्रसाद जी ने परतंत्र भारत के नागरिकों में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करने का एक सुंदर प्रयास किया हैं.

साथ ही साथ देश के प्रति प्रेम के भावना को व्यख्यान करते हुए कवि ने भारतीय वीर सपूतों को उत्साहित करते हुए ललकारा है और जगरूक किया कि हे देश के वीरों हिमालय की चोटी से भारत माता स्वतंत्रता की रक्षा हेतु पुकार रही हैं. और कवि सैनिको को अपनी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए प्रोत्साहित करते हैं. और रक्षा के लिए निरंतर कदम  बढ़ाते रहने का संदेश देते हैं.

साथ ही असंग यश और कीर्ति की किरणें ज्वाला के समानता में कर्तव्यपूर्ण रास्ते पर बढ़ते रहने की प्रेरणा दे रहे हैं. दुश्मनों के सैन्य समुद्र में बड़वानी और ज्वालामुखी बनकर उनपर टूट पड़ने की प्रेरणा देते हैं. और उन्हें जित की प्राप्ति करो राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित करते है, इस गीत में कवि ने अपने अतीत के गौरव करते हुए सैनिको को अपने दुश्मनों को धुल चटाने और उनपर विजय प्राप्त करने का सन्देश देते हैं. और इससे परतंत्रता की बेड़ियों को तोड़कर फेंकने में काफी मदद मिलता है.

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